राष्ट्र के नवनिर्माण के उद्देश्य से गठित भारतीय शक्ति चेतना पार्टी का पंजीकरण 7-6-2013 को कराया गया।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की प्रथम बैठक में युग चेतना पुरुष परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज पार्टी के प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।
युगचेतनापुरुष परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज-
भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के संस्थापक-संचालक धर्मसम्राट युग चेतना पुरुष परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने राष्ट्र के नवनिर्माण हेतु पार्टी की नींव रखी।जिसके माध्यम से देश को धर्म व अध्यात्मिकता से पोषित करते हुए देश की एकता, अखंडता एवं संपूर्ण विकास के लिए समस्त प्रकार के जाति-धर्म- संप्रदाय के लोगों का आवाहन किया गया।
राष्ट्रकल्याण हेतु भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के संदर्भ में सद्गुरुदेव महाराज जी के विशिष्ट कार्यपद्धति से युक्त संक्षिप्त परिचय निम्नवत् है।
धर्मरक्षा हेतु धर्माधिकारियों से चर्चा-
राष्ट्रोत्थान हेतु धर्ममय राजनीति आवश्यक है। आवश्यक है कि धर्म के मार्गदर्शन में राजनीति का संचालन हो। वह धर्म जो किसी भी प्रकार के भेदभाव व पक्षपात से रहित समाज में संतुलन स्थापित करता है। इसी परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज पवित्र उद्देश्य को लेकर सद्गुरुदेव जी महाराज के द्वारा अपने युवाकाल में पूर्ण धार्मिक-अध्यात्मिक जीवन जीते हुए धर्मगुरुओं व मठाधीशों से उक्त विषय पर चर्चा करने का प्रयास कई-२ बार किया गया।
धर्मजगत आडंबर से मुक्त हो सके, धर्मजगत सुयोग्य-पात्र व्यक्तियों के हाथों संचालित हो, साथ ही राजनीति को नीतिवान-सत्यमार्गी संतों का सान्निध्य मिल सके एवं भारतीय धर्म एकमत में पुन: आवस्थित हो सके, इसलिए विभिन्न प्रदेशों में जाकर गुरुदेव ने संपूर्ण धर्मजगत का आवाहन किया कि अध्यात्मिक-वैज्ञानिक परीक्षण द्वारा भटकाव के इस युग में सत्य का एक ऐसा नवीन मार्ग प्रशस्त किया जाय जिससे समाज में पुन: सत्य-धर्म एवं आपसी भाईचारे की स्थापना हो सके।
किंतु, इस पावन-पुनीत कार्य में किसी धर्मप्रमुख का योगदान या सहयोग न मिला। फलस्वरूप सद्गुरुदेव जी महाराज ने युगपरिवर्तन हेतु घर-घर में सत्य-धर्म की स्थापना के लिए पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट एवं भगवती मानव कल्याण संगठन का गठन किया। जिनके माध्यम से आज करोड़ों लोग नशा-माँसाहार, जातिभेद-छुआछूत, भ्रष्टाचार व चरित्रहीनता से मुक्त होकर अध्यात्मिक यात्रा तय करते हुए सुख-शांति का जीवन व्यतीत कर रहे हैं एवं नित ही नए-नए लोगों को इन संकल्पों से बांधकर युगपरिवर्तन के इस पर्व में हर क्षण ज्योत से ज्योत जलाने का कार्य किया जा रहा है।
राजनेताओं का आवाहन-
सन् 1996-97 में सिद्धाश्रम ट्रस्ट एवं संगठन का गठन करके संसार के धर्मजगत को एक नवीन मार्ग प्रदान करते हुए सद्गुरुदेव महाराज जी ने राजनीति जगत को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए राजनेताओं एवं विभिन्न राजनीतिक पार्टियों का आवाहन किया। अपने हर शिविरों में मंच से राजनेताओं व पार्टियों की कमियों को बताते हुए राष्ट्रहितकारी सलाह देकर, भ्रष्ट राजनीति को सुधारने का प्रयास वर्षों तक सद्गुरुदेव जी महाराज द्वारा किया गया।
सद्गुरुदेव जी की अध्यात्मिक शक्तियों को पहचानकर जिन राजनेताओं ने सत्य की विचारधारा पर चलने का विश्वास देकर राजनीतिक विजय हेतु गुरुदेव जी का आशीर्वाद चाहा, उन्हे गुरुदेव जी ने आशीर्वाद देकर शिष्यों के समर्थन से विजयी भी बनाया। परंतु, विजय का आशीर्वाद पाकर भी कई-कई राजनेताओं ने केवल अपना ही स्वार्थ साधने का कार्य किया। राष्ट्रहित के लिए कई बार आवाहन करने एवं जताने के बाद भी न ही किसी राजनेता ने और न ही किसी पार्टी ने गुरूदेव जी द्वारा प्रदत्त सत्य की विचारधारा को अपनाने का साहस दिखाया।
राजनीतिक पार्टी का गठन-
समय दर समय राजनीति में बढते भ्रष्टाचार एवं राष्ट्र का बडे पैमाने पर होते हुए पतन को देखकर राष्ट्ररक्षा व भारत के सुंदर भविष्य निर्माण हेतु सन, 2013 में सद्गुरुदेव जी द्वारा भारतीय शक्ति चेतना पार्टी का गठन किया गया। गुरुदेव जी की अध्यात्मिक शक्तियों व नीतिपूर्ण मार्गदर्शन के प्राप्ति के योग्य समाज से कोई भी राजनैतिक विकल्प न मिलने के कारण सद्गुरुदेव जी महाराज के द्वारा पार्टी के निर्माण से युगनिर्माण का एक सुंदर अध्याय प्रारंभ हुआ।
स्थापित पार्टियों की भ्रष्ट राजनीति से परेशान जनता को इस पार्टी के माध्यम से एक ऐसा विकल्प प्रदान किया गया है जो जनसेवा को अपना धर्म व कर्तव्य मानकर वास्तव में समाज के हर तबके का उत्थान करने का अनुपम कार्य कर रही है। प्रत्यक्ष रूप से धर्म-अध्यात्म का जीवन जीने वाले युग चेतना पुरुष सद्गुरुदेव महाराज जी द्वारा राजनीतिक पार्टी की स्थापना पर समाज ने तंज भी कसा, परंतु प्राचीन भारत की धर्मनीति के साथ राजनीति की श्रेष्ठ परंपरा को जीवंत करते हुए गुरुदेव जी महाराज ने भविष्यवाणी भी की कि आने वाले समय में भारतीय शक्ति चेतना पार्टी ही विश्वजगत में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में अपने दायित्वों का निर्वाहन-
भारतीय शक्ति चेतना पार्टी को राष्ट्ररक्षा व जनसेवा हेतु ठोस आधार देने के लिए सद्गुरुदेव जी ने अपने साधनात्मक एवं जनकल्याणकारी कार्यों की अनंत व्यस्तताओं के बाद भी पार्टी के सभी सदस्यों के आग्रह पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया। पार्टी के नैतिक सिद्धांतों एवं समाजसेवी विचारधारा के अनुरुप ही पार्टी की समस्त इकाई में पदाधिकारियों का चयन करके सद्गुरुदेव जी द्वारा पार्टी को प्रारंभ से ही विभिन्न जिलों एवं प्रांतों में गति प्रदान की गई।
चूंकि पार्टी का उद्देश्य महज़ सत्ता प्राप्ति न होकर व्यवस्था में परिवर्तन व संतुलन लाना है, जिसमें सबको समान अधिकार प्राप्त हो। वह संतुलन जिसमें सदियों से गरीबी व शोषण से परेशान असहायों को समाज की मुख्यधारा से जोड दिया जाय और जिसमें वर्षों पूर्व आजाद हुआ भारत अपनी आज़ादी का अहसास वास्तविकता के साथ कर सके। इसीलिए पार्टी के प्रचार-प्रसार हेतु, अनर्गल शोर-शराबों एवं प्रदर्शन से अलग सद्गुरुदेव जी द्वारा अध्यक्ष के रूप में ज़मीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को कार्य कराकर तैयार करने की नीति अपनाई गई।
युग चेतना पुरूष योगीराज श्री शक्तिपुत्र महाराज जी ने अपने पुरुषार्थ एवं चेतनात्मक वाक्शक्ति के बल पर राजनीति से कोसों दूर जीवनयापन करने वाले साधारण मनुष्यों में भी राजनीति का प्राण फूंककर उन्हें राजनीति से जोड़कर कर्तव्यों के निर्वहन हेतु तैयार करने का भागीरथी कार्य किया। इसी का परिणाम है कि जो आम आदमी कल तक राजनीति को कीचड़ कहकर उससे सर्वथा दूर रहने की बात कहता था, वही आम आदमी आज भारतीय शक्ति चेतना पार्टी से जुड़कर इस राजनीतिक अभियान को जीवन का परम सौभाग्य मानते हुए पार्टी के लिए बढ़-चढ़कर कार्य कर रहा है।
स्वतंत्र रुप से पार्टी का मार्गदर्शन-
दो वर्ष तक राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पार्टी की गतिविधियों का संचालन करने के बाद अपने साधनात्मक क्रमों एवं जनकल्याणकारी कार्यों की असीमित व्यस्तताओं के कारण 15-5-2015 को सद्गुरुदेव योगीराज श्री शक्तिपुत्र महाराज जी ने अध्यक्ष पद के कार्यभार से स्वयं को मुक्त कर लिया। इन दो वर्षों में पार्टी का, नियमित बैठकों एवं विशेष अभियानों के माध्यम से आमजनमानस में वह स्थान बना कि पार्टी की अनूठी-नवीन विचारधारा युक्त गतिविधियों को देखकर लाखों लोगो ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। ब्लांक स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक की सशक्त टीम का गठन करके पार्टी के भाव-विचारों को कार्य के रूप में परिणित करने का जटिल कार्य संकल्प बल के साथ निरंतर रुप से संपन्न हुआ।
सबसे मुख्य बात यह कि सर्वज्ञानी ऋषियों-संतों-महात्माओं के मार्गदर्शन में फलती-फूलती राष्ट्रहितकारी वैदिक युगीन राजनीति की स्थापना भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के रूप मे समाज को पुन: देखने को मिली। जिसमें समस्त प्रकार की राजनीतिक गतिविधियां, अनिवार्य मानवीय कर्तव्यों की संज्ञा 'धर्म' पर ही आधारित होती हैं।
इसके साथ ही सद्गुरुदेव जी का सदैव चिंतन रहा है कि यदि राजनीति में युवाओं का रचनात्मक हस्तक्षेप हो एवं युवा जगत की राजनीतिक रुचि बढ़े, तो राजनीति का सही व उचित उपयोग समाज हेतु हो सकता है। इसीलिए सद्गुरुदेव जी के बाद बहन संध्या शुक्ला जी को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया।
फिर भी, दो वर्ष पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर रहकर पार्टी को विशेष रूप से गति प्रदान करने के पश्चात्, अध्यक्ष पद से स्वयं को मुक्त करने के बाद भी वर्तमान में पार्टी के सदस्यों व पदाधिकारियों को पार्टी के संस्थापक-संचालक सद्गुरुदेव परम पूज्य योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज का राजनीतिक मार्गदर्शन निरंतर रूप से प्राप्त हो रहा है।
यदि हम भारत का प्राचीन इतिहास देखें तो राजनीति का मार्गदर्शन तो सदैव ही ऋषियों -मुनियों के द्वारा किया गया है परंतु किसी ऋषि के द्वारा राष्ट्रकल्याण हेतु मूल स्वरूप के साथ राजनीति की स्थापना एवं सदैव के लिए उसका मार्गदर्शन न पूर्व में कभी हुआ था और न ही भविष्य में कभी होगा। यह समाज का सौभाग्य है कि विश्वजगत को धर्म-अध्यात्म के मार्ग पर पुन: बढ़ाने वाले युगपरिवर्तक परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र महाराज जी का मार्गदर्शन, राजनीतिक रूप से भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के माध्यम से आज प्राप्त हो रहा है।