ज्ञापन में उन्होंने मांग की कि सरकार स्कूल पुस्तकों की अधिकतम कीमत तय करे, ताकि निजी विद्यालयों द्वारा मनमानी वसूली पर रोक लग सके और किताबें किसी भी दुकान पर उपलब्ध हों। साथ ही स्कूल फीस में अनावश्यक बढ़ोतरी पर नियंत्रण के लिए नियम बनाए जाएं, जिससे पांच वर्षों में अधिकतम पांच प्रतिशत से अधिक वृद्धि न हो। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि बार-बार सिलेबस बदलने की प्रवृत्ति पर रोक लगाते हुए कम से कम पांच वर्षों तक पाठ्यक्रम स्थिर रखा जाए।
इसके अतिरिक्त विद्यालयों द्वारा भवन निर्माण या अन्य गैर-शैक्षणिक मदों में शुल्क वसूली पर रोक लगाने तथा अनिवार्य की गई पुस्तकों को पढ़ाना सुनिश्चित करने की मांग की गई। गुलाबचंद्र कुशवाहा ने कहा कि इन कदमों से शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी, सुलभ और जनहितकारी बन सकेगी।
